कोई भी उपाय तभी लाभकारी सिद्ध होगा जब आप पूर्ण श्रद्गा, भाव और विश्वास से करे।
विश्व में श्रद्धा, भक्ति और शक्ति के प्रतिक अंजनी पुत्र वीर हनुमान कलियुग के अधिष्ठाता देव हैं। शास्त्रों के अनुसार त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के जन्म से पहले भगवान शिव का 11वां अवतार रुद्र रूप में हुआ, जो हनुमान जी के नाम से प्रसिद्ध हुए। वह अपनी निष्काम सेवा और प्रभु भक्ति के बल पर भारतीय संस्कृति में पूज्य माने जाते हैं।
भगवान वाल्मीकि जी के अनुसार महाकपि केसरी सुमेरू पर्वत पर शासन करते थे। महाकपि केसरी और अंजनी के पुत्र हनुमान 'केसरी नंदन' कहलाए। प्रभु श्री राम के परम भक्त श्री हनुमान जी के आते ही सभी प्रकार के भूत-प्रेत भाग जाते हैं। अष्ट सिद्धियां और नव निधियां जिनके समक्ष नृत्य करती हैं ऐसे वीर हनुमान कलियुग में सभी के सहायक बनते हैं।
हनुमानजी की आराधना से श्रद्धालुओं की
मनोकामना शीघ्र पूर्ण होगी।
कलियुग में सभी कामनाओं की पूर्ति के लिए नियम से 40 दिन तक श्री हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। इससे बल एवं बुद्धि जागृत होती है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य,मंगल शनि राहु के दोषों के निवारण हेतु हनुमान आराधना विशेष मानी जाती है। पूर्णिमा पर चित्रा नक्षत्र और राजयोग मिलने पर जयंती का आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ गया है।
कलियुग में भक्तों के कष्टों को हरने में हनुमान समान दूसरा कोई देव नहीं है। वे जल्दी कृपा करते हैं।
गोस्वामी तुलसीदास उनके बारे में लिखते हैं, 'संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बल बीरा।"
शुभ ऊर्जा और शक्ति के लिए
हनुमान जयंती के दिन हनुमानजी की उपासना व चोला चढ़ाने से शुभ ऊर्जा-शक्ति मिलती है। जिनके कष्टों का अंत ना हो रहा हो वे बजरंगबली को तेल-सिंदूर का चोला अवश्य चढ़ाएं।
परेशानियों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो कुछ हुनमान मंत्र रामबाण उपाय है।
ॐ हं हनुमंतये नम: मंत्र का जाप करने से जीवन के तमाम कष्ट दूर हो जाएंगे।
तेज और शक्ति बढ़ाने के लिए
हनुमान जयंती के दिन हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड, रामायण, राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
दुश्मनों से मुक्ति के लिए
बजरंगबली को हनुमान जयंती के दिन देशी घी के रोट का भोग लगाने से दुश्मनों से मुक्ति मिलती है।
व्यापार में वृद्धि और आकस्मिक संकट के लिए
हनुमान जयंती के दिन सिंदूरी रंग का लंगोट हनुमानजी को पहनाइए। हनुमान जयंती पर मंदिर की छत पर लगाइए लाल झंडा और आकस्मिक संकटों से मुक्ति पाइए।
इस दिन कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। इससे आप पर आ रहे संकट दूर होंगे।
एक नारियल पर सिन्दूर, मौली, अक्षत अर्पित कर पूजन करें। फिर हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ा आएं।
आप पीपल के वृक्ष की जड में तेल का दीपक जला दें। फिर वापस घर आ जाएं एवं पीछे मुडकर न देखें। धन लाभ होगा।
शनि की साढ़े साती और ढैया के लिए गुड़ और चने चढ़ाये ।
चमेली के तेल के 2 दीपक आटे से बनाकर लगाये ।
बजरंगबली चमत्कारिक सफलता देने वाले देवता माने गए हैं। इसलिए इनकी आराधना श्रद्धा से नियमित और निश्चित समय तक करना चाहिए ।

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