ज्योतिर्विद ब्रजेंद्र श्रीवास्तव, ग्वालियर, बंगलौर ने भी दी श्रद्धांजलि
यह आकस्मिक खबर दुखद। प्रख्यात शिल्पकार प्रभात राय की कला प्रस्तर हो मिट्टी हो या धातु सभी में प्राण फूंक देती थी। 
आपने उचित ही लिखा है प्रवीण जी, कि हम उन्हें कभी भी नहीं भुला सकते।
प्रभात राय अपनी कलाकृतियों में ही अमर हो गए हैं ।
*कला में सौंदर्य का स्पर्श प्रकृति में व्याप्त सत्य से साक्षात्कार होने पर ही उतरता है। प्रभात ने अपने सृजन की प्रक्रिया में इस सत्यम शिवम सुंदरम का निरंतर साक्षात्कार किया है। इसी लिए प्रभात की कला में यह सौंदर्य है जो सदैव बना रहेगा। शत शत नमन प्रभात राय को। ईश्वर प्रभात रायकी आत्मा को शांति और मोक्ष प्रदान करें। सादर। (प्रवीन दुबे जी से फोटो सहित आलेख साभार)।

कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें