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ग्राम कोटा में विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर हुई चर्चा

गुरुवार, 30 मई 2024

/ by Vipin Shukla Mama
ग्राम कोटा में विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर पुरुषों के साथ आओ खुलकर बात करें, इस गलत सोच को छोड़ने का लें संकल्प करे पर चर्चा की
शिवपुरी। महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं और किशोरियों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसलिए हर वर्ष 28 मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। इसी उद्देश्य को लेकर शक्ति शाली महिला संगठन, ब्रिटानिया न्यूट्रीशन फाउंडेशन एवम जिला प्रशासन के द्वारा पूरे सप्ताह अनेक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं इसी क्रम में आज ग्राम कोटा में पुरुषों के साथ इस मुद्दे पर समुदाय के चोपाल पर  इस मुद्दे पर घरों में मासिक धर्म को लेकर सकारात्मक माहौल बनाने को लेकर चर्चा की अधिक जानकारी देते हुए कार्यक्रम संयोजक रवि गोयल शक्ति शाली महिला संगठन ने बताया की इस दिवस एवम सप्ताह का उद्देश्य समाज में फैली मासिक धर्म संबंधी गलत अवधारणाओं को दूर करना, महिलाओं और किशोरियों को माहवारी प्रबंधन संबंधी सही जानकारी देना है। 28 मई की तारीख निर्धारित करने के पीछे मकसद है कि मई वर्ष का पांचवां महीना होता है। यह अमूमन प्रत्येक 28 दिनों के पश्चात होने वाले स्त्री के पांच दिनों के मासिक चक्र का परिचायक है। संस्था की किशोरी स्वास्थ की एक्सपर्ट श्रद्धा जादौन ने इस अवसर पर समुदाय को बताया की माहवारी नौ से 13 वर्ष  की लड़कियों के शरीर में होने वाली एक सामान्य हार्मोनल प्रक्रिया है। इसकेे फलस्वरूप शरीर में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। यह प्राकृतिक प्रक्रिया सभी लड़कियों में किशोरावस्था के अंतिम चरण से शुरू होकर (रजस्वला) उनके संपूर्ण प्रजनन काल (रजोनिवृत्ति पूर्व) तक जारी रहती है। आज भी बहुत सी किशोरियां मासिक धर्म के कारण स्कूल नहीं जाती हैं। महिलाओं को आज भी इस मुद्दे पर बात करने में झिझक होती है। आधे से ज्यादा लोगों को लगता है कि मासिक धर्म अपराध है एनएएफएचएस 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 58 प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधन का उपयोग करती हैं। प्रदेश में यह आंकड़ा 47 प्रतिशत है।
महिलाओं की कुल जनसंख्या का 75 प्रतिशत आज भी गांवों में है। इनमें से देश में 48 प्रतिशत व प्रदेश में 40 प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधन का उपयोग करती हैं।
44 प्रतिशत महिलाएं यह कहती हैं कि वे अपनी माहवारी प्रबंधन की सामग्री को धोकर पुन: उपयोग करती हैं।
पुरषों से जब पूछा तो उन्होंने कहा की  इस विषय में बातचीत न करने की हिदायत दी जाती है।
आज भी देश के कई परिवारों में लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान परिवार से अलग-थलग कर दिया जाता है। मंदिर जाने या पूजा करने की मनाही होती है। रसोई में प्रवेश वर्जित होता है। उनका बिस्तर अलग कर दिया जाता है। परिवार के किसी भी पुरुष सदस्य से इस विषय में बातचीत न करने की हिदायत दी जाती है। ललित ओझा ने कहती हैं कि मासिक धर्म के बारे में बताने वाली सबसे अच्छी जगह स्कूल हैं। यहां  इस विषय को यौन शिक्षा और स्वच्छता से जोड़कर चर्चा की जा सकती है। साथ ही जागरूक और उत्साही शिक्षकों की जरूरत है, जो विद्यार्थियों को मासिक धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दे सकें। वह कहती हैं कि घर में बच्चियों की मां भी इस बारे में अपनी सोच बदलें। इस बारे में अपनी बेटियों को ठीक से बताएं, ताकि उनकी बेटी को किसी के सामने शर्मिंदा न होना पड़े। अंत में सभी पुरषों ने अपने अपने घरों में मासिक धर्म को लेकर अच्छा माहौल बनाने का संकल्प लिया इस मुद्दे पर चुप्पी तोडी। प्रोग्राम में समुदाय के पुरुषों में  रोहित मलखान पवन अमित राहुल गोपाल आदिवासी आदि, श्यामलाल आदीवासी 
बिरजू आदिवासी ,प्रकाश आदिवासी मुन्ना आदीवासी सुखराम आदीवासी  अनिल आदिवासी  विरजेश आदिवासी 
रोहित आदिवासी  दिलीप आदिवासी सुभाष आदिवासी के साथ आगनवाड़ी कार्यकर्ता आशा धाकड़ सहायिका संदीप कौर आशा राधा राजपूत ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।















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