शिवपुरी। धन, वैभव, प्रेम, सौंदर्य और सुख-समृद्धि के कारक शुक्र ग्रह 29 अप्रैल को अस्त हो गए थे. जो 29 जून की शाम पश्चिम दिशा में उदय हो गए हैं। ज्योतिष के अनुसार, किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य को करने के लिए शुक्र ग्रह का उदित होना बेहद जरूरी माना जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी पर बुध की राशि मिथुन में शुक्र ग्रह का उदय हो गया है। इस राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है।
शुक्रोदय होने के पूरे 10 दिन बाद ही शहनाइयां गूंजेंगी। इसके बाद सभी शुभ और मांगलिक कार्य शादी-विवाह, नामकरण, जनेऊ, मुंडन, गृहप्रवेश, भूमि पूजन, भवन-वाहन, आभूषण की खरीदारी शुरू हो जाएगी। शुक्र ग्रह के उदय होने से विवाह आदि के लिए इंतजार कर रहे लोगों को कुछ शुभ मुहूर्त भी मिलेंगे।
आइए जानते हैं कि शुक्र के उदय होने के बाद कब से कब तक विवाह आदि कार्य किए जा सकेंगे., विवाह में ग्रहों की शुभता जरूरी
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी-विवाह में शुभ मुहूर्त का होना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। विवाह बंधन को सबसे पवित्र रिश्ता कहा गया है, इसलिए इसमें शुभ मुहूर्त का होना जरूरी है. वहीं, शादी के शुभ मुहूर्त के लिए नौ ग्रहों में गुरु, शुक्र और सूर्य का उदित होना जरूरी माना गया है. वहीं, अगर रवि गुरु का संयोग हो तो यह और अधिक सिद्धिदायक और शुभ फलदायी होता है. इन तिथियों पर शादी-विवाह करना बेहद शुभ माना गया है. शुक्र और गुरु ग्रह के अस्त होने पर विवाह आदि कार्य नहीं किए जाते हैं।
शुक्र अस्त तिथि
शुक्र का उदय 29 जून 2024 की रात 7 बजकर 52 मिनट पर पर हो चुका। विवाह मांगलिक आदि कार्यो के लिए शुक्र तारे के उदित होने का विशेष महत्व बताया जाता है। इसके बाद 7, 9, 11, 12, 13, 15 जुलाई को विवाह आदि हो सकेंगे। इन दोनों तारों के उदित होने के बाद देवशयनी एकादशी तक विवाह आदि कार्य संपन्न किए जा सकेंगे। फिर 17 जुलाई को देवशयनी एकादशी के बाद चातुर्मास का आरंभ होगा, जिससे चार महीने तक मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाएगी।
इसके बाद 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी से विवाह मुहूर्त फिर से शुरू हो जाएंगे और 14 दिसंबर तक चलेंगे। नवंबर में विवाह के 7 और दिसंबर में 8 मुहूर्त मिलेंगे।

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