भारतीय पहलवान विनेश फोगाट आज किसी परिचय की मोहताज नहीं। हरियाणा के चरखी दादरी ज़िले से आती हैं। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली विनेश फोगाट पहली महिला भारतीय पहलवान हैं। वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत कर विनेस टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाइ करने वाली पहली पहलवान बनीं।इस विषय में आगे लिखने के पहले इन साइड कहानी पर आपका ध्यान केंद्रित करते हैं। ये लेख साभार हैं। आइए कीजिए कल से लेकर आज तक की कुश्ती की कहानी....
पहलवान ट्रायल्स के पक्ष में नही थे जबकि कुश्ती संघ ट्रायल्स के बाद योग्य बच्चों को ओलम्पिक में भेजना चाहता था, यही असल वजह थी पहलवान और कुश्ती संघ के बीच टकराव की। कुश्ती संघ को नियमो से चलना चाहता था और पहलवान नियम मानने को तैयार नही थे, उन्हें बिना ट्रायल्स के ओलम्पिक में जाना था जूनियर बच्चों का हक मारकर।तब इस घटना में राजनीति हुई, तमाम बवाल हुए, अंतररष्ट्रीय स्तर पर भारत की बदनामी भी हुई। सारी कहानी यही से शुरू होती है।
कहानी दो भागों में है। पहले आपको फ्लैश बैक यानी भूतकाल में लिए चलते हैं।
बृजभूषण शरण सिंह व पहलवानों के विवाद व सरकार की किरकिरी होने पर सरकार द्वारा कुश्ती संघ को भंग कर दिया गया।
अब जब कुश्ती संघ भंग हो चुका था तो एडहॉक कमेटी सारा काम देख रही थी।
5 महीने पहले की बात है, SAI के पटियाला सेंटर में 50 किलोग्राम और 53 किलोग्राम भार वर्ग में ओलम्पिक 2024 के लिए कुश्ती के ट्रायल्स होने थे।
विनेश ने SAI के पटियाला सेंटर में करीब तीन घंटे तक 50 KG और 53 KG वेट कैटेगरी के मुकाबले शुरू नहीं होने दिए, अधिकारियों द्वारा विनेश के इन दोनों वेट कैटेगरी में एक साथ हिस्सा लेने पर सहमति बनने के बाद ही दोपहर 1:30 बजे ट्रायल्स शुरू हो सके।
असल मे विनेश शुरू से 53 किलोग्राम भार वर्ग से कुश्ती लड़ती थी जिसमें अंतिम पंघाल को पहले ही कोटा मिल चुका था इसलिए विनेश चाहती थी कि या तो उन्हें 50 और 53 दोनों कैटेगिरी से लड़ने की इजाजत दी जाए या फिर 53 किलो की कैटेगिरी का ट्रायल ओलम्पिक से ठीक पहले करवाया जाए क्योंकि विनेश को डर था कि यदि WFI के हाथ मे दुबारा कमान आ गयी तब सीधा अंतिम पंघाल को ओलम्पिक में भेजा जा सकता है कोटे से इसलिए वह अधिकारियों से 53 किलो वेट कैटेगरी के आखिरी ट्रायल ओलिंपिक से ठीक पहले दोबारा कराने का लिखित आश्वासन या फिर दोनों वेट कैटेगरी में लड़ने की इजाजत देने की मांग कर रही थीं।
बाद में एडहॉक बॉडी ने उन्हें दोनों कैटेगरी में लड़ने की इजाजत दे दी।
नियमो को ताक पर रख विनेश के रुतबे को देख कर ऐसा पहली बार हो रहा था कि एक पहलवान किसी पूरे टूर्नामेंट में एक साथ दो वेट कैटेगरी में हिस्सा ले रहा था।
आमतौर पर ट्रायल में पहलवान एक वेट कैटेगरी में हारने के बाद दूसरी वेट कैटेगरी की कुश्ती लड़ लेता था पर यहाँ विनेश ने दोनों भार वर्ग में एक साथ लड़ा।
ऐसे में 50 किलो भार वर्ग की कई जूनियर खिलाड़ियों ने विनेश के इस रवैय्ये का विरोध किया था।
53 किलोग्राम भार वर्ग में 4 शीर्ष पहलवानों का मुकाबला होना था और जो विजयी रहती उसका मुकाबला कोटा धारी अंतिम पंघाल से होना था, तब जो जीतता वो ओलम्पिक में जाता।
पर विनेश 53 किलोग्राम कैटेगरी का सेमीफाइनल मुकाबला तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर अंजू से 0-10 से हार गईं।
इसके बाद उन्होंने 50 किलोग्राम वेट कैटेगरी में शिवानी पवार को 11-6 से हराया और ट्रायल्स जीत कर ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई कर लिया।
ये तो थी वो चीज जो 5 महीने पूर्व हुआ।
ताजा आज की खबर ये है कि पहलवानों का वजन प्रतियोगिता शुरू से होने से पहले एक बार और किसी भी प्रकार के मैडल वाले मुकाबले के शुरू होने से एक दिन पहले और मैच शुरू होने से ठीक पहले फिर दुबारा यानी दो बार किया जाता है।
सूत्रों की माने तो मंगलवार की रात को मुकाबले से एक दिन पहले विनेश का जब वजन किया गया तब वह 52 किलो से भी ज्यादा था।
विनेश ने सारी रात साइकलिंग, जॉगिंग व रस्सी कूद की और वजन को कम करते करते 50 किलो के बेहद करीब ले आयी लेकिन वझन 100 ग्राम फिर भी ज्यादा रह गया।
विनेश और स्टाफ ने इसे कम करने के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय मांगा पर ओलम्पिक कमेटी ने साफ मना करते हुए उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया।
खबर तो यहाँ तक आ रही है कि विनेश इस 50 किलो को मेन्टेन करने के लिए कई कई दिनों से खाना तक सही से नहीं खा रही थी।
यदि जो खबरे सामने आई है अब तक वो सत्य है तो इसमें दोष केवल और केवल विनेश की खुद को नियम कानूनों से ऊपर समझने की जिद व उनके साथ गए सपोर्टिंग स्टाफ व कोच का है। कुश्ती संघ से पहलवानों का सारा विवाद भी इसी चीज के इर्द गिर्द था।
कुश्ती संघ नियम से चलना चाहता था, वो चाहता था कि हर बच्चे को ट्रायल देने का मौका मिले और तब जो बेहतरीन हो वो ओलम्पिक खेले ताकि किसी जूनियर बच्चे के साथ नाइंसाफी न हो।
पर पहलवान सीधे बिना ट्रायल ओलम्पिक जाना चाहते थे।
भारत मे तो इन्हें बेटी की तरह माना गया तो हर मनमर्जी सही गयी, नियमो में छूट भी मिली पर ओलम्पिक कमेटी ने अतिरिक्त समय देने से साफ इंकार कर दिया।
नियम तो नियम है, विपक्षी पहलवान का हक भी कोई चीज है।
जब स्पष्ट नियम थे 50 किलो के तो 1 ग्राम की छूट का भी कोई मतलब नही है।
यही बात कुश्ती संघ भी चाहता था कि सब काम नियम से हो पर विनेश 53 किलोग्राम की होने के बावजूद पहले तो 50 में गयी और गयी तो गयी उसे मेंटेन नही रख पाई जिसका खामियाजा देश की बदनामी और करोड़ो कुश्ती प्रेमियों की पीड़ा के रूप में आज हम सबको देखना पड़ रहा है।
राष्ट्रवादी तबका कल से चमचों द्वारा की जा रही बत्तमीजी के बावजूद एक बार को इनकी पुरानी हरकतों (पहलवान आंदोलन मंच से लगे आपत्तिजनक नारे व इनके द्वारा प्रधानमंत्री के लिए की गई अभद्रता) को भूल के इनके समर्थन में आ गया था पर आज की घटना ने फिर मन विचलित कर दिया।
समझ नही आ रहा कि किस बात की सजा मिल रही है भारतीयों को ओलम्पिक में।
यह लम्हा हम भारतीयों और विनेश को ताउम्र याद रहेगा।
इतिहास बनते बनते रह गया।
गलती किसी की भी रही हो पर 1 अरब 40 करोड़ लोगों की आशाओं पर पानी फिर गया है। (इंजीनियर राघव जी लिखित, साभार)

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