श्री गणेश चतुर्थी आज है। पूरे दस दिन भगवान श्री गणेश की आराधना होगी। इस बार गणपति स्थापना पर सुमुख नाम का शुभ योग बन रहा है। ये गणेशजी का एक नाम भी है। इसके साथ पारिजात, बुधादित्य और सर्वार्थसिद्धि योग बन रहे हैं। गणेश चतुर्थी की तिथि 6 सितंबर यानी कल दोपहर 3 बजकर 01 मिनट पर शुरू हो चुकी है और इस तिथि का समापन 7 सितंबर यानी आज शाम 5 बजकर 37 मिनट पर होगा। गणेश स्थापना का समय 7 सितंबर यानी आज सुबह 11 बजकर 03 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि इस चतुर्महा योग में गणपति स्थापना का शुभ फल और बढ़ जाएगा।
ग्वालियर के ख्यातीनाम ज्योतिर्विद बृजेंद्र श्रीवास्तव के अनुसार शनिवार दिन 11.20 से दोपहर 13.21 के मध्य वृश्चिक लग्न गुरु दृष्ट। इसमें में 12 28 बजे मध्याह्न अभिजित मुहूर्त अति श्रेष्ठ ।
वृश्चिक मूलाधार का कारक g है। गणेश जी मूलाधार में ही स्थिति हैं।
।।ॐ गं गणपतये नमः।।
यह बीज मंत्र गणपति अथर्व शीर्ष में हैं
आज गणपति स्थापना और पूजा के लिए दिनभर में 3 शुभ मुहूर्त रहेंगे। मूर्ति स्थापना सूर्यास्त के पहले करने का विधान है। गणेश पुराण के मुताबिक गणपति का जन्म चतुर्थी तिथि और चित्रा नक्षत्र में मध्याह्न काल में हुआ था। ये शुभ काल सुबह 11.20 से शुरू हो रहा है।
आज गणपति स्थापना और पूजा के लिए दिनभर में 3 शुभ मुहूर्त रहेंगे। मूर्ति स्थापना सूर्यास्त के पहले करने का विधान है। गणेश पुराण के मुताबिक गणपति का जन्म चतुर्थी तिथि और चित्रा नक्षत्र में मध्याह्न काल में हुआ था। ये शुभ काल सुबह 11.20 से शुरू हो रहा है।
गणपति स्थापना के मुहूर्त
* सुबह 8 से 9.30 तक
* सुबह 11.20 से दोपहर 1.40 तक (मध्याह्न काल)
* दोपहर 2 से शाम 5.30 तक
ग्रंथों के मुताबिक वैसे तो गणेशजी के कई रूप हैं, लेकिन भादो के महीने में आने वाली इस गणेश चतुर्थी पर सिद्धि विनायक रूप में गणेशजी को पूजने का विधान है। गणेशजी के इस रूप की पूजा भगवान विष्णु ने की और ये नाम भी दिया।गणेश चतुर्थी पर सिद्धि विनायक की पूजा का विधान
भगवान गणेश की इस मूर्ति में दायां दांत टूटा और बायां वाला पूरा रहता है। नाग की जनेऊ पहने, जांचें मोटी और घुटने बड़े होते हैं। दायां पैर मुड़ा हुआ और बायां नीचे की तरफ निकला हुआ होता है। एक हाथ आशीर्वाद देते हुए और दूसरे में अंकुश (हथियार) रहता है। एक हाथ में मोदक और दूसरे में रुद्राक्ष की माला रहती है। सिर पर मुकुट, गले में हार पहने बैठी हुई मूर्ति लाल रंग की होती है।
ये गणेश सुख और समृद्धि देते हैं। इनकी पूजा हर मांगलिक कामों से पहले होती है। जो हर काम का शुभ फल बढ़ा देते हैं। इसलिए इन्हें सिद्धि विनायक कहते हैं। इन्हें घर में पूजना चाहिए।
गणपति स्थापना की विधि
*सूर्योदय से पहले नहाकर धुले हुए कपड़े पहनें।
*जहां मूर्ति स्थापना करनी हो वहां आसन लगाकर बैठें और गणपति स्थापना का संकल्प लें।
*अपने सामने चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर चावल रखें।
*तांबे के चौड़े बर्तन में चंदन या कुमकुम से स्वस्तिक बनाकर चावल पर रखें। इस बर्तन में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
गणेश पूजन में कौन से फूल और पत्ते इस्तेमाल करें
फूल: जाती, मल्लिका, कनेर, कमल, गुलाब, चंपा, गेंदा, मौलश्री (बकुल)
पत्तेः दूर्वा, शमी, धतूरा, कनेर, केला, बेर, मदार और बिल्वपत्र
गणेश पुराण के अनुसार गणेश जी की पूजा विधि
*घी का दीपक जलाकर दूध और पंचामृत से स्नान करवाएं
*अष्टगंध और लाल चंदन से गणेशजी को तिलक लगाएं।
*फूल और बिल्वपत्र की माला पहनाएं। मिठाई का भोग लगाएं।
*लौंग, इलाइची, केसर, कपूर, सुपारी और कत्थे वाला पान चढ़ाएं।
*आरती कर 21 बार प्रदक्षिणा करें और दक्षिणा चढ़ाएं।
इनसे पूजन न कर पाएं तो इसके लिए छोटी पूजा विधि
1. चौकी पर स्वस्तिक बनाकर एक चुटकी चावल रखें।
2. उस पर मौली लपेटी हुई सुपारी रखें। इन सुपारी गणेश की पूजा करें।
3. इतना भी न हो पाए तो श्रद्धा से सिर्फ मोदक और दूर्वा चढ़ाकर प्रणाम करने से भी भगवान की कृपा मिलती है।
गणेश पूजा में इन बातों का ध्यान रखें
*गणपति को तुलसी न चढ़ाएं।
*पूजा में नीले, काले रंग के कपड़े न पहनें।
*दूर्वा और मोदक के बिना पूजा अधूरी रहती है।
*स्थापित मूर्ति को हिलाएं नहीं और अकेला न छोड़ें।
किसी वजह से गणेश स्थापना और पूजा न कर पाएं तो क्या करें
पूरे गणेशोत्सव में हर दिन गणपति के सिर्फ तीन मंत्र का जाप करने से भी पुण्य मिलता है। सुबह नहाने के बाद गणेशजी के मंत्रों को पढ़कर प्रणाम कर के ऑफिस-दुकान या किसी भी काम के लिए निकलना चाहिए।
गणेशजी के तीन मंत्र और उनका अर्थ
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।।
अर्थ : घुमावदार सूंड़ वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली। मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरा करने की कृपा करें।
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय । लम्बोदराय सकलाय जगद्विताय ।। नागाननाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय । गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ॥
अर्थ : हे विघ्नेश्वर, वर देने वाले, देवताओं को प्रिय, लम्बोदर, कलाओं से परिपूर्ण, जगत का हित करने वाले, गज के समान मुख वाले और वेद तथा यज्ञ से विभूषित पार्वती पुत्र को नमस्कार है। हे गणनाथ ! आपको नमस्कार है।
अमेयाय च हेरम्ब परशुधारकाय ते । मषक वाहनायैव विश्वेशाय नमो नमः ॥
अर्थ : हे हेरम्ब ! आपको किन्हीं प्रमाणों द्वारा मापा नहीं जा सकता, आप परशु धारण करने वाले हैं, आपका वाहन मूषक है। आप विश्वेश्वर को बारम्बार नमस्कार है।

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