कोलारस। श्रीमद् भागवत कथा कोलारस वीरम खेड़ी रेलवे स्टेशन के पास ठाकुर बाबा पर जारी है। कथा के पंचम दिवस पंडित आचार्य श्री मुकेश शास्त्री जी महाराज द्वारा भगवान बाल कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि जब अधर्म और अभिमान का प्रकोप बढ़ता है तब - तब भगवान ने अपनी विभिन्न लीलाओं के माध्यम से ऐसे अभिमानियों को उनकी गलती का एहसास कराया और श्रृष्टि की रक्षा की। श्रीमद भागवत कथा में भी इंद्र का ही अभिमान नहीं बल्कि हरेक अभिमानियों के अभिमान को दूर करते हुए भगवान ने श्रीगोवर्धन पूजा कराई और आज उसी गोवर्धन में श्रद्धा का सैलाब हर माह उमड़ रहा है, इसलिए मनुष्य किसी भी प्रकार का अभिमान ना पाले कि उसने फला काम कर दिया तो यह उसकी वजह से
हुआ बल्कि अपने द्वारा की गई किसी भी प्रकार की मदद हो या सहयोग उसे ईश्वर स्वरुप मानकर ही करना चाहिए तभी यह मानव जीवन सार्थक होगा। इंद्र के अभिमान को तोड़ते हुए श्रीगोवर्धन पूजा का यह तत्व बताया व्यासपीठ से पंडित मुकेश शास्त्री जी महाराज ने जो स्थानीय ठाकुर बाबा मंदिर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में गोवर्धन पूजा कथा वृतान्त का उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रवण करा रहे थे। परिजनों के द्वारा श्रीमद् भागवत पूजन व श्रीगोवर्धन पूजन किया गया तत्पश्चात गोवर्धन परिक्रमा करते हुए उत्साह और उल्लास के साथ श्रीगोवर्धन पूजा के भजन गाए गए। इस अवसर पर कथावाचक मुकेश शास्त्री जी ने इस संसार के हरेक मनुष्य को उसके बोध कराते हुए कहा कि किसी भी रूप में हमें अभिमान नहीं करना चाहिए बल्कि विनम्रता और सहजता से अपने कार्यों को करना चाहिए, यह सरल-सहज स्वभाव अपने संस्कारों के साथ आने वाली पीढ़ी में भी दें ताकि हरेक घर-परिवार में सरलता, सहजता और विनम्रता बनी रहे। भगवान कहते है,की जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल प्राप्त होगा,कभी भी भाग्य के भरोसे नही बैठना चाहिए,भाग्य और कर्म लॉकर की दो चाबियों की तरह है,भाग्य की चाबी प्रभु के हाथों में है और कर्म की चाबी जीव के हाथों में है,हम अपने कर्म की चाबी घूमाते रहे,पता नही कब भगवान भाग्य की चाबी लगा दें,उद्धार का मार्ग खुल जाए,भगवान ने इंद्र की पूजा बंद करवा कर गिरिराज पर्वत की पूजा करवाई,जिससे इंद्र नाराज हो गया,भयंकर बारिश करने की आज्ञा दे दी,वृजवासियो की रक्षा करने के लिए 7 कोस के पर्वत को अपनी कनिष्टिका उंगली पर धारण किया,7 दिन तक लगातार बारिश हुई, भगवान ने सभी की रक्षा की,इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ,वह प्रभु की शरण मे आया और भगवान से छमा मांगी, एव वृजवासी बनने का वरदान मांग, भागवत कथा में पधारे कोलारस के विधायक महेंद्र यादव उनका शॉल श्री फल माला पहनाकर स्वागत किया गया कथा के विराम में मुख्य यजमान द्वारा आरती की गई एव 56 भोग एवं अन्नकूट का प्रसाद वितरण किया गया।
हुआ बल्कि अपने द्वारा की गई किसी भी प्रकार की मदद हो या सहयोग उसे ईश्वर स्वरुप मानकर ही करना चाहिए तभी यह मानव जीवन सार्थक होगा। इंद्र के अभिमान को तोड़ते हुए श्रीगोवर्धन पूजा का यह तत्व बताया व्यासपीठ से पंडित मुकेश शास्त्री जी महाराज ने जो स्थानीय ठाकुर बाबा मंदिर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में गोवर्धन पूजा कथा वृतान्त का उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रवण करा रहे थे। परिजनों के द्वारा श्रीमद् भागवत पूजन व श्रीगोवर्धन पूजन किया गया तत्पश्चात गोवर्धन परिक्रमा करते हुए उत्साह और उल्लास के साथ श्रीगोवर्धन पूजा के भजन गाए गए। इस अवसर पर कथावाचक मुकेश शास्त्री जी ने इस संसार के हरेक मनुष्य को उसके बोध कराते हुए कहा कि किसी भी रूप में हमें अभिमान नहीं करना चाहिए बल्कि विनम्रता और सहजता से अपने कार्यों को करना चाहिए, यह सरल-सहज स्वभाव अपने संस्कारों के साथ आने वाली पीढ़ी में भी दें ताकि हरेक घर-परिवार में सरलता, सहजता और विनम्रता बनी रहे। भगवान कहते है,की जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल प्राप्त होगा,कभी भी भाग्य के भरोसे नही बैठना चाहिए,भाग्य और कर्म लॉकर की दो चाबियों की तरह है,भाग्य की चाबी प्रभु के हाथों में है और कर्म की चाबी जीव के हाथों में है,हम अपने कर्म की चाबी घूमाते रहे,पता नही कब भगवान भाग्य की चाबी लगा दें,उद्धार का मार्ग खुल जाए,भगवान ने इंद्र की पूजा बंद करवा कर गिरिराज पर्वत की पूजा करवाई,जिससे इंद्र नाराज हो गया,भयंकर बारिश करने की आज्ञा दे दी,वृजवासियो की रक्षा करने के लिए 7 कोस के पर्वत को अपनी कनिष्टिका उंगली पर धारण किया,7 दिन तक लगातार बारिश हुई, भगवान ने सभी की रक्षा की,इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ,वह प्रभु की शरण मे आया और भगवान से छमा मांगी, एव वृजवासी बनने का वरदान मांग, भागवत कथा में पधारे कोलारस के विधायक महेंद्र यादव उनका शॉल श्री फल माला पहनाकर स्वागत किया गया कथा के विराम में मुख्य यजमान द्वारा आरती की गई एव 56 भोग एवं अन्नकूट का प्रसाद वितरण किया गया।

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